कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर बाणी

हिमाचल प्रदेश दुर्गम पर्वत-घाटियों का भू-भाग है। यहां एक-दूसरे क्षेत्रों के बीच भौगोलिक अवरोध बहुत विकट रहे हैं। अत: यहां भिन्न-भिन्न बोलियों का विकास हुआ और इन बोलियों का अस्तित्व आज भी पाया जाता है। आर्य भाषा परिवार की इन बोलियों में परस्पर अनेक ऐसी समानताएं पाई जाती हैं जिनके आधार पर भाषाविदों ने इन भिन्न-भिन्न बोलियों को सामूहिक रूप में पहाड़ी भाषा का नाम प्रदान किया है।

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