मन्दिर पंचवक्त्र महादेव | मण्डी, हिमाचल प्रदेश

मन्दिर पंचवक्त्र महादेव

विरासत रूपी पहचान : मण्डी के देवालय

डाॅ• कमल के• प्यासा

    यह शिव मन्दिर भी व्यास व सुकेती के संगम पर सिद्ध भ्रदा देवी के मन्दिर से नीचे की और स्थित है। शिखर शैली का यह मन्दिर एक ऊंचे चबूतरे पर बना है। इसी खुले चबूतरे पर ही सदर का प्रदक्षिणा पथ है। मन्दिर के छोटे से गर्भगृह के आगे एक खुला व बड़ा सा सभा मण्डप बना है। मन्दिर की छत भी पत्थरों से ही बनी है जो चार बड़े-बड़े गोल स्तम्भों पर टिकी है। सभा मण्डप के इन स्तम्भों पर कई प्रकार की उकेरी गई आकृतियां देखने को मिलती हैं जिनमें पशु-पक्षियों के साथ ही साथ राजा व उसके सेवकों को चंवर के साथ व राजा को तम्बाकू पीते दिखाया गया है। कहीं-कहीं योगाभ्यास करते हुए योगी तो कहीं नरसिंह अवतार जैसी आकृतियां दिखाई गई हैं।

    सभामण्डल के आगे बने छोटे से गर्भगृह में एक पांचमुखी महादेव शिव की प्रतिमा स्थापित है। आदम कद इस प्रतिमा का आकार 3 फुट x 5 फुट x 3 फुट है। इसी तरह की एक अन्य प्रतिमा बाहर सभा मण्डप में भी रखी हुई है जिसका आकार 3½ x 3½ x4 का है। भगवान शिव की पंचमुखी इन दोनों प्रतिमाओं में शिव को पालथी मारे बैठी मुद्रा (सौम्य मुद्रा) में दिखाया गया है। प्रतिमा में भगवान शिव के चार मुख चारों दिशाओं की ओर तथा पांचवां मुख चारों सिरों के ऊपर की ओर दिखाया गया है। शिव के गले में रुद्राक्ष माला भी दिखाई गई है।

    सभा मण्डप के ठीक मध्य में एक बड़े आकार के शिव वाहन नन्दी को देखा जा सकता है। वाहन की इसी प्रतिमा पर नकाशी करके सुन्दर चित्रण किया गया है। इस शिला वाहन का आधार नौ फुट, चौड़ाई पौन पांच फुट तथा ऊंचाई सात फुट के लगभग देखी गई। वाहन नन्दी के पीछे की ओर मानव आकृति (ग्वाला) को पूंछ पकड़े दिखाया गया है।

    सभा मण्डप में रखी हुई प्रतिमाओं में चार शिला शिव लिंग देखने को मिलते हैं जिनमें से तीन गोलाकार (कमल व डमरु रुपी) तथा एक वर्गाकार रुप में हैं। गर्भगृह के द्वार के ऊपर की ओर परियों को नृत्य करते हुए दिखाया गया है तथा नीचे की ओर राक्षसों के मुखों को पंक्ति में दिखाया गया है यहां रखी गई अन्य प्रतिमाओं मे एक पंचमुखी पंचवक्त्र महादेव की (गर्भगृह में रण प्रतिमा जैसी), दो चतुर्भुजी देव गणेश की 2 फुट x 1½ फुट आकार की बैठी मुद्रा (चौखड़ी मारे) व खड़ी मुद्रा की प्रतिमाएं जिसमें गणेश के चारों हाथों में क्रमानुसार कमण्डल, माल तथा बांई ओर पोथी व लड्डू लिए दिखाया गया है। इन प्रतिमाओं में देव गणेश के गले में सांप व सिर पर मुकुट भी दिखाया गया है। एक भगवान शिव की 2 फुट के आधार वाली प्रतिमा दिखाई गई है। यह प्रतिमा ऊंचाई में 2½ फुट के लगभग है तथा भगवान शिव इस प्रतिमा में कमलासन पर बैठे ध्यान मुद्रा में दिखाए गए हैं जिनके गले में सांप भी है। दो अन्य शिला वाहन भी इसी सभामण्डप में रखे देखे जा सकते हैं जिनमें से एक देवी वाहन सिंह आकार 2½ फुट (लम्बाई में) बैठी मुद्रा में तथा दूसरा शिव वाहन नन्दी जिसका आकार  2 फुट x 2½ फुट x पौने दो फुट का देखा गया।

    सभामण्डप के प्रवेश द्वार के दोनों ओर एक-एक आदम कद द्वारपाल, जिनके कानों में बड़ी-बड़ी बलियां, गले में माला व यन्त्र तथा भुजाओं में ताबीज दिखाया गया है, भी देखे जा सकते हैं। द्वारपालों के शारीरिक चित्रण में उनकी बड़ी-बड़ी आंखों के साथ बांई ओर के द्वारपाल के हाथ में दण्ड तथा दाई ओर वाले के हाथ में सांप दिखाया गया है। दोनों द्वारपालों ने लंगोट धारण कर रखी है और आकार में दोनों शिला प्रतिमाएं 5 फुट x 2 फुट की देखी गई। मन्दिर के बाहर के झरोखों में कुछ एक में प्रतिमाएं आज भी हैं और कुछ बिना प्रतिमाओं के हैं। बाहरी दीवारों पर ही कई एक पर नृत्य मुद्राएंव पशु-पक्षियों की आकृतियां देखने को मिलती हैं। कछ बाहरी दीवारों के पत्थर घिस चुके हैं जो कि सुकेती खड्ड तथा ब्यास नदी के बाढ़ रुपी प्रकोप को प्रकट करते हैं।

    इसी पंचवक्त्र मन्दिर के ऊपर बांई ओर एक अन्य छोटे से मन्दिर के अवशेष देखने को मिलते हैं लेकिन वह छोटा सा मन्दिर अब पूरी तरह से नष्ट हो चुका है।

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